What is promoters share Pledging : निवेशकों के लिए  खतरा.

Promoters Share Pledging


शेयर गिरवी  (Share Pledged)

शेयर गिरवी रखना उन विकल्पों में से एक है जो कंपनियों के प्रमोटर कार्यशील पूंजी की आवश्यकता, व्यक्तिगत जरूरतों और अन्य उपक्रमों या अधिग्रहणों को पूरा करने के लिए सुरक्षित ऋण के लिए उपयोग करते हैं।
एक कंपनी में एक प्रमोटर शेयरधारिता का उपयोग ऋण लेने के लिए संपार्श्विक ( Collateral )के रूप में किया जाता है। Share Pledging करते  समय, प्रमोटर अपना स्वामित्व बनाए रखते हैं।

संपार्श्विक(Collateral):-

शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव होता रहता है, इसी उतार-चढ़ाव का प्रभाव सीधे संपार्श्विक(Collateral) के मूल्य पर भी पड़ता है । एक ऋणदाता(Lender) के साथ गिरवी रखे गए शेयरों का बाज़ार मूल्य एक निश्चित स्तर से कम हो जाता है तो यह 'मार्जिन कॉल' को ट्रिगर करता है, जिससे प्रमोटरों को संपार्श्विक(Collateral) के मूल्य में कमी के लिए नगत भुकतान करने की आवश्यकता होती है।

विवरण (Description):-

कंपनियों के लिए हर समय शेयर गिरवी (pledging) रखना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि प्रमोटर को उधारदाताओं को अतिरिक्त शेयर प्रदान करके हर समय संपार्श्विक(Collateral) के मूल्य को बनाए रखना आवश्यक होता है, खासतौर पर जब संपार्श्विक मूल्य समाप्त हो जाता या कम हो जाता है।



डिफ़ॉल्ट(Default):- 

  •  यदि प्रमोटर संपार्श्विक मूल्य में अंतर बनाये रखने में विफल रहते हैं तो उधारकर्ता पैसे की वसूली के लिए खुले बाजार में शेयर बेच सकते हैं इससे कंपनी में प्रमोटरों की शेयर होल्डिंग में भारी कमी हो सकती है जिसे हम डिफ़ॉल्ट भी कहते है |
  • शेयर में अतिरिक्त मूल्य कम होने के कारण स्टॉक मूल्य मै और अधिक गिरावट हो सकती है, और शेयरहोल्डिंग पैटर्न में परिवर्तन के कारण कंपनी में अचानक तरलता (liquidity) की कमी कमी की स्थिति पैदा हो सकती है जैसे- IL&FS आपके सामने एक उदाहरण है।
  • शेयर गिरवी (pledging) कंपनियों के लिए धन तक पहुँचने का एक मानक तरीका है, लेकिन अतीत में कड़वे अनुभवों ने साधन के बारे में नकारात्मक धारणा बनाई है, क्योंकि यह खराब नकदी प्रवाह पैटर्न, एक कंपनी में क्रेडिट की कमी और प्रवर्तकों की अल्पकालिक कार्य को और पूंजीगत आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थता को इंगित करता है।

NOTE-

निवेशकों के लिए खतरा

शेयरहोल्डर को खतरा तब होता है, जब प्रमोटर अक्सर व्यक्तिगत जरूरतों के लिए भी इस तरह की हिस्सेदारी दे सकते है, और निवेशकों को धोखे मै रखा जा सकता है |

शेयर खरीदते समय ध्यान देने योग्य बातें:-

  • निवेसक द्वारा शेयर होल्डिंग एक महत्वपूर्ण फैसला है, खासकर जब आप इक्विटी में निवेश करते है क्युकी इक्विटी में निवेश एक रिस्क भी है और रिवॉर्ड भी |
  • एक अच्छा रिवॉर्ड इस बात पर निर्भर करता है, आपने अपने निवेश के लिए स्टॉक का चयन किस प्रकार किया है |                                                                                                                                        

Stock Selection:-

स्टॉक चयन में अगर आपने नीचे दिए हुए बातों पर ध्यान देंगे तो आप निश्चित तौर पर एक अच्छा रिवॉर्ड पा सकते है और धोखे से भी बच सकते है |
  1. Share pledged by promoter- Below 10%.
  2. Stock PE Ratio- Between 10-20.
  3. Price to book value- 1.50 to 6.
  4. Market cap- Avboe 30,000Cr.
  5. Promoter holding- Check Increase-decrease back history.
  6. FII/FPI holding - Check Increase-decrease back history.
  7. Volume in stock- Above average 5lakh (buyer and seller).
  8. Sale growth- Above average YoY
  9. Net Profit- Above average YoY
  10. Net NPA(for bank sector)- Should not increase every year.
  11. Provision&Contingencies- Should not increase every year.
  12. DII holding- Check Increase-decrease back history.
  13. Do not invest in companies- which are involved in various controversies.
  14. Choose the sector you know best
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भारत के प्रतिभूति बाजार नियामक:-

(SEBI)सेबी ने, सत्यम घोटाले क मद्देनजर ऐसे उधारों के उचित प्रकटीकरण पर कुछ नियम और कानून तैयार किए हैं फरवरी 2013 में, मार्जिन कॉल की आशंका से भारतीय बाजार में कई मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई थी |

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